10+ short story for kids in hindi: हिंदी में बच्चों के लिए सबसे अच्छी कहानियाँ

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आज इस लेख short story for kids in hindi में हम कुछ ऐसी ही रोचक कहानियाँ साझा करने जा रहे हैं जिन्हें आपको अवश्य पढ़ना चाहिए। ये कहानियां सबसे अच्छी कहानियों में से एक हो सकती हैं क्योंकि इन कहानियों को सह नहीं किया गया है [कहीं से भी हमने बहुत मेहनत के बाद लिखा है। तो कृपया अद्भुत कहानियाँ पढ़ें। आज के ब्लॉग में हम 5 कहानियाँ साझा करने जा रहे हैं।

हम सभी जानते हैं कि छात्रों के लिए कहानियां कितनी महत्वपूर्ण हैं, अगर आप माता-पिता या शिक्षक हैं तो इन कहानियों को अपने बच्चों के साथ अवश्य साझा करें क्योंकि आज हम सबसे अच्छी लघु कहानियों में से एक को साझा करने जा रहे हैं।

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अगर आप एक छात्र हैं तो मुझे यकीन है कि आपको मेरी मां की मदद से मेरे द्वारा लिखी गई कहानियां पसंद आएंगी।

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10+ short story for kids in hindi | Story for kids in hindi

अपना कीमती समय बर्बाद किए बिना, short story for kids in hindi शुरू करते हैं। कृपया ध्यान दें कि हम निम्नलिखित लेख आपके साथ साझा करेंगे।

  1. कुतुब मीनार
  2. मेहनत से ही फल मिलता है
  3. मेरी छोटी बहन
  4. दहेज एक कुप्रथा

आज के लेख के अंत तक, हम आपके साथ एक भयानक लघु कथा साझा करने जा रहे हैं, इसलिए अंत तक बने रहें।

कुतुब मीनार

कुतुब मीनार का निर्माण कार्य कुतुब-उद दिन ऐबक ने 1199 संस्थापक थे। । कुतुब मीनार को पूरा करने के लिए उत्तराधिकारी ऐबक ने उसमें तीन और मीनारे बनवायी थे। कुतुब मीनार के नाम के सल्तनत कुतुब-उद-दिन ऐबक के नाम पर रखा गया है, और इसे बनाने वाला बख्तिार काकी एक सूफी संत था। कहा जाता है कि कुतुब मीनार का आर्किटेक्चर तुर्की के आने से पहले भारत में ही बनाया गया था। लेकिन कुतुब मीनार के सम्बन्ध में इतिहास में हमें कोई भी दस्तावेज नहीं मिलता है।

लेकिन कथित तथ्यों के अनुसार इसे राजपूत मीनारों से प्रेरित होकर बनाया गया था। पारसी-अरेबिक और नागरी भाषाओ में भी हमें कुतुब मीनार के इतिहास के कुछ अंश दिखाई देते हैं। कुतुब मीनार के सम्बन्ध में जो भी ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध है वो फ़िरोज शाह तुगल्क (1351-89) और सिकंदर लोदी (1489-1517) से मिली हैं। कुतुब मीनार भारत में दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली भाग में स्थित, ईंट से बनी विव की सबसे ऊँची मीनार है। यह परिसर युनेस्को द्वारा विव घरोहर के रूप में स्वीकृत किया गया है।

मेहनत से ही फल मिलता है

जो लगन और कठोर परिश्रम करते है वही जीवन में सफल होते हैं। बिना प्रयत्न के कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। नेपोलियन ने एक बार कहा था, “ईश्वर हमेशा बहादुर लोगों के साथ होता है।” यह सत्य है कि ईश्वर हमेशा कठोर परिश्रम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करता है। सफलता प्राप्त करने के लिए कोई राजपथ अथवा छोटा रास्ता नहीं ।

कोई भी छात्र जब तक पूरे साल मेहनत नहीं करता अच्छे अंक प्राप्त नहीं कर सकता। एक किसान कड़ी मेहनत के बाद ही अपने खेत से अच्छी फसल प्राप्त का सकता है। वकील बिना कानूनी किताबें पढ़े अपने मुवक्किल की पैरवी नहीं कर सकता। एक अच्छे व्यवसायी को व्यवसाय में अच्छे लाभ के लए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। वैज्ञानिक अनेक वर्षों के कठोर परिश्रम के बाद ही किसी आविष्कार को कर पाते हैं। इसलिए हमेशा याद रखें कि बिना मेहनत के कोई फल नहीं मिलता।

मेरी छोटी बहन

मेरी छोटी प्यारी बहन कभी न माने किसी का कहना शैतानी करती है हरदम शैतानी में इसको है रहना कभी कूदती इधर-उधर कभी फूदकती यहाँ-वहाँ शैतानी है इसका काम करे ये शैतानी में नाम लेकिन है ये सबसे प्यारी पूरे घर की है ये दुलारी है ये मेरी प्यारी बहना कभी न माने किसी का कहना ।

दहेज एक कुप्रथा

हमारे समाज में अनेक कुप्रथाएँ प्रचलित है। इन कुप्रथाओ में से दहेज भी एक ऐसी ही कुप्रथा है। यह सामाजिक कुप्रथाओं में सबसे अधिक निंदनीय है। इस कुप्रथा के कारण हमारा समाज निरंतर पतन की ओर चला जा रहा है। इस कुप्रथा की जितनी भी निंदा की जाए, वह भी कम होगी।

आइए, हम दहेज प्रथा के इतिहास के बारे में जान लें। प्रारंभ में यह प्रथा अत्यंत अच्छे कर्म एवं पवित्र रूप में शुरू हुई थी। विवाह के अवसर पर कन्या को खाली हाथ ससुराल भेजना अपशकुन माना जाता था। पिता के घर पर उसका भी हिस्सा होता है। अतः विवाह के अवसर पर माता-पिता अपनी हैसियत के अनुसार अपनी पुत्री को उपहार एवं जीवनोपयोगी वस्तुएँ देकर विदा करते थे। तब यह एक सात्विक प्रथा थी। इसमें किसी प्रकार की माँग नही होती थी। धीरे-धीरे समाज में अर्थ की प्रधानता होती चली गई और यह सुप्रथा भी कुप्रथा में परिवर्तित

होती चली गई।

समय का सदुपयोग

समय निरंतर गतिशील है। समय का चक्र लगातार घूमता रहता है। समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। विधाता प्रत्येक प्राणी के जीवन के क्षण निश्चित करके उसे इस धरती पर भेजता है। इस निश्चित समय में उसे अपने सभी कार्य पूरे करने होते हैं। जीवन का प्रत्येक क्षण अमूल्य है। यदि एक क्षण का भी दुरुपयोग किया जाता है तो मानव को पछताना पड़ता हैं।

अतः समय का सदुपयोग करना आवश्यक है। समय और मानव जीवन प्रकृति की अमूल्य निधि हैं। दोनों का ताल-मेल होना आवश्यक है। यदि समय के अनुसार चलना नहीं सीखा तो जीवन की दौड़ में पीछे रह जाएँगे। हमें समय को खाली बैठकर व्यर्थ नहीं गवाँना चाहिए। जो समय को नष्ट करता है, समय उसे नष्ट कर देता है। समय के साथ चलने वाला मनुष्य पश्चाताप की अग्नि में कभी नहीं जलता। सफलता, यश, सम्मान उसके कदम चूमते हैं। खुशियों से उसकी झोली भरी रहती है। इसीलिए संत कबीर ने मनुष्य को सचेत करते हुए कहा है-

“काल करै सो आज कर, आज करै सो अब । पल में परलय होएगी, बहुरि करोगे कब।।”

इस लघुकथा का नैतिक है कि समय किसी का इंतजार नहीं करता, इसलिए समय को अपने हाथ से कभी न जाने दें, समय इतनी तेजी से भागता है। जब आप अपने समय में नियमित होते हैं तो आपको एक सफल व्यक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता।

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अगर आप एक छात्र हैं तो मैं आपको बता दूं कि आपको कभी भी अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए, आपको अपने समय के एक-एक मिनट का सदुपयोग करना चाहिए।

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हम अपनी वेबसाइट पर ऐसे जानकारीपूर्ण लेख साझा करते रहते हैं। इसलिए अधिक जानकारी के लिए अन्य लेख या ब्लॉग पोस्ट देखें।

हम जल्द ही एक नई कहानी के साथ वापस आएंगे, तब तक हम अपने दोस्तों को लेते हैं। हम आशा करते हैं कि आपको short story for kids in hindi, Story for kids in hindi, short stories for kids in hindi, story in hindi for kids पसंद आएंगी, यदि आपके कोई प्रश्न हैं तो हमें कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आपको जल्द से जल्द जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे।

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